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पावन श्री हरमिलाप गद्दी का प्रारंभ प्रथम गुरूदेव सत् श्री हरमिलाप साहिब जी ने संवत 1577 में गजनी अफगानिस्तान में किया। यह एक सच्ची व सुच्ची गद्दी है। समय-समय पर इस गौरवमयी गद्दी के सभी साहिबों ने मसीहा बनकर समाज को संकट से उबारा और नगर-नगर, गांव-गांव में जाकर श्री हरमिलाप साहिब जी के आदेश, उपदेश व संदेशों का प्रचार किया।

गजनी से श्री हरमिलाप साहिब जी डेरा इस्माईल खान, जो अब पश्चिमी पाकिस्तान में है, में आ गए और वहीं पर अपना स्थान बना लिया। इस पावन गद्दी के ग्यारहवें गुरुदेव श्री मुनि हरमिलापी जी महाराज विभाजन से पूर्व हरिद्वार आ गए और वहां पर मिशन के प्रमुख स्थान 'श्री हरमिलाप भवन' की स्थापना की।

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